गर्भवती और दुध पिलाने वाली महिला के रोज़े का हुक्म

भी मुसाफ़िर की तरह ही है जैसा कि अनस बिन मालिक काअब (रज़ि) कहते है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया निःसन्देह अल्लाह तआला ने मुसाफ़िर से रोज़ा और आधी नमाज़, और गर्भवती और दुध पिलाने वाली महिला से  रोज़ा माफ़ कर दिया है | (हसन)

(इब्ने माजह-1667 तिर्मिज़ी-715)

नोट:-छूटे हुवे रोजे बादमे कज़ा करना ज़रूरी है जैसा कि अल्लाह तआला फ़रमाते है कि

अल-बक़रा (Al-Baqarah):185 - रमज़ान का महीना जिसमें कुरआन उतारा गया लोगों के मार्गदर्शन के लिए, और मार्गदर्शन और सत्य-असत्य के अन्तर के प्रमाणों के साथा। अतः तुममें जो कोई इस महीने में मौजूद हो उसे चाहिए कि उसके रोज़े रखे और जो बीमार हो या सफ़र में हो तो दूसरे दिनों में गिनती पूरी कर ले। अल्लाह तुम्हारे साथ आसानी चाहता है, वह तुम्हारे साथ सख़्ती और कठिनाई नहीं चाहता, (वह तुम्हारे लिए आसानी पैदा कर रहा है) और चाहता है कि तुम संख्या पूरी कर लो और जो सीधा मार्ग तुम्हें दिखाया गया है, उस पर अल्लाह की बड़ाई प्रकट करो और ताकि तुम कृतज्ञ बनो.

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